दिखावे का डस्टबिन रमेश भाई अपने इलाके के बड़े प्रतिष्ठित नागरिक थे। स्वच्छता अभियान पर फेसबुक पर लंबा पोस्ट लिखना उनका रोज का काम था। एक सुबह वे अपनी चमचमाती कार से दफ्तर के लिए निकले। रास्ते में उन्होंने गाड़ी का शीशा नीचे किया और केले का छिलका सड़क पर फेंक दिया। पीछे से आ रहे एक बाइक सवार ने देख लिया। उसने बाइक रोकी, छिलका उठाया और रमेश भाई की गाड़ी का पीछा किया। रेड लाइट पर जैसे ही रमेश भाई रुके, उस लड़के ने उनकी गाड़ी का शीशा खटखटाया। रमेश भाई ने शीशा नीचे किया तो लड़के ने वो छिलका मुस्कुराते हुए उनकी गोद में रख दिया और बोला, "सर, आपकी कीमती चीज सड़क पर गिर गई थी। फेसबुक प्रोफाइल पर तो आपने डस्टबिन की फोटो लगा रखी है, सोचा असली गाड़ी में भी रखवा दूं।" आस-पास के लोग हंसने लगे। रमेश भाई का चेहरा शर्म से लाल हो गया। सीख: नागरिक समझ सोशल मीडिया पर ज्ञान बांटने से नहीं, जमीन पर अमल करने से आती है।
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