सती सावित्री: यमराज से पति के प्राण वापस लाना राजकुमारी सावित्री ने सत्यवान नाम के एक गुणी लेकिन निर्वासित राजकुमार से विवाह किया, यह जानते हुए भी कि सत्यवान की आयु बहुत कम है और विवाह के ठीक एक वर्ष बाद उसकी मृत्यु निश्चित है। •.जब वह दुखद दिन आया, तो मृत्यु के देवता यमराज पृथ्वी पर आए और सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे। सावित्री ने हार नहीं मानी और यमराज के पीछे-पीछे यमलोक के रास्ते पर चल पड़ीं। सावित्री के इस साहस, पतिव्रता धर्म और धर्म पर दिए गए उनके विचारों से प्रभावित होकर यमराज ने उन्हें तीन वरदान मांगने को कहा, बशर्ते वे सत्यवान के प्राण न मांगें। • अपने अंतिम वरदान में सावित्री ने कहा, "मुझे सौ गुणी पुत्रों की माता बनने का वरदान दें।" यमराज ने बिना सोचे-समझे 'तथास्तु' कह दिया। वरदान देते ही यमराज को अपनी भूल का अहसास हुआ, क्योंकि एक सती स्त्री के लिए पति के बिना संतान होना संभव नहीं था। • यमराज को सावित्री की बुद्धिमानी के आगे झुकना पड़ा और उन्होंने सत्यवान के प्राण वापस लौटा दिए। • सीख: दृढ़ संकल्प, सच्ची निष्ठा और तीक्ष्ण बुद्धि से भाग्य की लकीरों को भी बदला जा सकता है।
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