पौराणिक कथाओं के अनुसार, करवा माता एक परम पतिव्रता और साहसी स्त्री थीं, जिनके नाम पर करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। करवा माता की प्रसिद्ध कथाएँ मगरमच्छ और यमराज की कथा: एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री नदी के किनारे अपने पति के साथ रहती थी। एक दिन स्नान करते समय उनके पति को एक मगरमच्छ ने पकड़ लिया। अपनी सूझबूझ और सतीत्व के बल पर करवा ने मगरमच्छ को सूत के धागे से एक पेड़ से बांध दिया। इसके बाद वह यमराज के पास गईं और उनसे कहा कि वे मगरमच्छ को नरक में भेजें, क्योंकि उसने उनके पति को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की थी। करवा के इस तपोबल और हठ को देखकर यमराज ने उनके पति को लंबी आयु का आशीर्वाद दिया और मगरमच्छ को नरक में भेज दिया। तभी से उनके नाम पर करवा चौथ के व्रत की परंपरा शुरू हुई। माँ पार्वती का स्वरूप: कई धार्मिक मान्यताओं में करवा माता को माता पार्वती का ही स्वरूप माना जाता है। इसी कारण करवा चौथ के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ-साथ विशेष रूप से करवा माता की पूजा-अर्चना की जाती है। #bhakti
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