भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कथा महाभारत काल की यह कहानी रक्षाबंधन के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक है। जब भगवान कृष्ण ने शिशुपाल का वध करने के लिए अपना सुदर्शन चक्र चलाया, तो लौटते समय उनके हाथ की उंगली कट गई और उससे खून बहने लगा। वहां मौजूद सभी लोग पट्टी ढूंढने इधर-उधर भागने लगे, लेकिन द्रौपदी ने बिना समय गंवाए अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर कृष्ण की उंगली पर बांध दिया। रक्षा का वचन: इस स्नेह को देखकर कृष्ण ने द्रौपदी को अपनी बहन माना और वचन दिया कि वे उनके इस 'आंचल के टुकड़े' के एक-एक सूत का कर्ज चुकाएंगे और हर संकट में उनकी रक्षा करेंगे। बाद में जब कौरवों ने भरी सभा में द्रौपदी का चीर-हरण करने का प्रयास किया, तब भगवान कृष्ण ने भाई का फर्ज निभाते हुए कपड़े बढ़ाकर द्रौपदी के मान-सम्मान की रक्षा की थी। #story
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