Bhakti Sagar
@bhakti · 29 Oct 2026, 3:57 pm

करवा चौथ की संपूर्ण पूजा विधि सूर्योदय की सरगी से लेकर रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने तक कई चरणों में पूरी होती है। 1. सुबह की विधि (सरगी और संकल्प) • सरगी ग्रहण करना: ब्रह्म मुहूर्त में सास द्वारा दी गई सरगी (फलाहार, मिठाई और सुहाग की वस्तुएं) खाकर व्रत की शुरुआत करें। • व्रत का संकल्प: स्नान करके साफ वस्त्र पहनें, सोलह श्रृंगार करें और हाथ में अक्षत (चावल), फूल व जल लेकर पति की लंबी उम्र व अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत का संकल्प लें। 2. संध्या पूजन की तैयारी • वेदी का निर्माण: शाम को शुभ मुहूर्त से पहले दीवार पर या लकड़ी के पाटे पर गेरू (या रोली) से करवा चौथ माता, शिव-पार्वती और गणेशजी का चित्र बनाएं या उनका फोटो स्थापित करें। • करवा भरना: मिट्टी के टोंटीदार करवे में जल और थोड़ा सा मीठा (बताशा या शक्कर) भरें। करवे के ऊपर ढक्कन रखकर उसमें शक्कर या गेहूं भरें और उस पर दक्षिणा रखें। करवे पर रोली से 13 बिंदियां (टिकियां) लगाएं और कलावा बांधें। • शिव परिवार का पूजन: भगवान गणेश, माता पार्वती, शिवजी और करवा माता को रोली, अक्षत, धूप, दीप, पुष्प, और सुहाग की सामग्री (चूड़ी, सिंदूर, मेंहदी, चुनरी) अर्पित करें। 3. कथा और करवा फेरना • व्रत कथा सुनना: हाथ में गेहूं या अक्षत के दाने लेकर करवा चौथ की व्रत कथा सुनें या पढ़ें। • करवा फेरना: कथा के बाद आपस में एक-दूसरे के साथ या माता की प्रतिमा के सामने बैठकर 7 बार करवा फेरें और सुहाग प्राप्ति की प्रार्थना करें। 4. चंद्र दर्शन और व्रत का पारण • चंद्रमा को अर्घ्य: रात में चांद निकलने के बाद छलनी से पहले चंद्रमा के दर्शन करें और उन्हें जल (अर्घ्य) दें। • पति का चेहरा देखना: छलनी की ओट से ही पति का चेहरा देखें और उनकी आरती उतारें। • पारण: पति के हाथों से जल ग्रहण करके और कुछ मीठा खाकर अपना निर्जला व्रत खोलें। इसके बाद सास या घर के बड़ों का आशीर्वाद लें। #bhakti

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