Poetry Poet
@Poetry · 2 Nov 2026, 4:13 am
माँ सब जानती है यह कविता दर्शाती है कि एक माँ अपने बच्चे के बिना बोले ही उसके दिल की हर बात, उसके हर सुख और दुख को कैसे पहचान लेती है। माँ सब जानती है, तुझे खुद से भी ज्यादा पहचानती है, लाख कोशिश कर तू छिपाने की, तेरे हर सुख-दुख को वो जानती है। खुद जागकर तुझे सुलाती है, खुद रोकर तुझे हंसाती है, तन्हा रहती है खुद मगर, तेरा साथ हमेशा निभाती है, माँ सब जानती है। जब तुझे चोट लगे तो सिसकती है माँ, जब तू गलती करे तो समझती है माँ, तू ही तो है माँ का लाडला, जब तेरी आँखे भीगे आंसुओं से, तो अपना आँचल देती है माँ, माँ सब जानती है। (लेखक: दीपांशु गहलोत) #poetry #poem
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