Bhakti Sagar
@bhakti · 29 Oct 2026, 4:03 pm

करवा चौथ के दिन चांद और पति का चेहरा छलनी से देखने की परंपरा के पीछे कई धार्मिक, पौराणिक और प्रतीकात्मक कारण हैं: लंबी उम्र की कामना: मान्यता है कि छलनी में जितने छेद होते हैं, उतनी ही बार पति को देखने से उनकी आयु और सेहत उतनी ही लंबी और बढ़िया बनी रहती है। गणेश जी का श्राप (पौराणिक कथा): पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया था कि जो भी उन्हें सीधी आंखों से देखेगा उस पर कलंक या दोष लगेगा। इस दोष से बचने के लिए चंद्रमा को सीधे न देखकर छलनी या आड़ से देखने की परंपरा शुरू हुई। सकारात्मक ऊर्जा और फिल्टर: आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, छलनी की जाली (मेश) नकारात्मकता को रोककर केवल सकारात्मक और पवित्र ऊर्जा को छानकर अंदर लाती है। जब पत्नी छलनी से पति को देखती है, तो वह पवित्र ऊर्जा सीधे पति तक पहुंचती है। वीरवती की कथा: कथा के अनुसार, वीरवती नाम की स्त्री का व्रत उसके भाइयों द्वारा छलनी के पीछे आग का उजाला दिखाकर नकली चांद के जरिए तुड़वा दिया गया था, जिससे उसके पति की मृत्यु हो गई थी। बाद में नियम से व्रत पूरा करने के बाद असली चांद और पति को छलनी से देखने की शुरुआत हुई। प्रतीकात्मक संदेश: नवभारत टाइम्स के अनुसार, छलनी से पति का चेहरा देखना यह दर्शाता है कि रिश्ते में छोटी-मोटी कमियों या कमियों पर ध्यान देने के बजाय केवल अच्छाइयों और प्यार पर फोकस करना चाहिए। इसके अलावा, यह पुराने समय में चले आ रहे घूंघट या पर्दे की परंपरा का भी एक हल्का रूप माना जाता है।

0200

Join the conversation on Fifefy

Reply, react, or give this post one of your five daily Hi-Fives.