अहोई अष्टमी के दिन शाम को तारों (Stars) को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। अर्घ्य देने का सही और आसान तरीका नीचे दिया गया है: अर्घ्य देने की तैयारी • करवा (कलश): पूजा के समय तांबे या मिट्टी के जिस लोटे (करवे) में पानी भरकर रखा था, उसी पानी का उपयोग अर्घ्य देने के लिए करें। • अर्घ्य की थाली: थाली में रोली (कुंकुम), अक्षत (साबुत चावल) और पूजा में चढ़ाया गया हलवा, मालपुआ या कोई मिठाई रख लें। अर्घ्य देने की विधि (Step-by-Step) 1. तारों को देखना: आसमान में जब पहला तारा दिखाई दे, तब हाथों में लोटा लेकर तारों की तरफ मुख करके खड़े हो जाएं। 2. जल अर्पित करना: लोटे को अपने सीने की ऊंचाई तक लाएं और दोनों हाथों से जल को धीरे-धीरे नीचे गिराते हुए तारों को अर्पित करें। 3. ध्यान रखें: पानी सीधे पैरों पर न पड़े, इसलिए नीचे कोई गमला, साफ थाली या पौधा रख लें। 4. अक्षत और रोली: जल गिराते समय थोड़ा सा अक्षत (चावल) और रोली भी जल के साथ प्रवाहित करें। 5. प्रणाम और परिक्रमा: अर्घ्य देने के बाद अपनी ही जगह पर खड़े होकर चार बार घूमकर परिक्रमा करें और संतान की लंबी उम्र व सुरक्षा की प्रार्थना करें। इसके बाद घर के बड़ों (सास या जेठानी) का आशीर्वाद लें और बायन छूकर उन्हें दें, फिर स्वयं जल पीकर व्रत खोलें। #bhakti
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