Poetry Poet
@Poetry · 2 Nov 2026, 4:14 am
माँ का आँचल और समर्पण यह कविता माँ के उस निस्वार्थ रूप को समर्पित है, जो बच्चे की खुशी के लिए अपनी इच्छाओं को भूल जाती है और हर मुश्किल में उसकी ढाल बनती है। सारे दुखों का किनारा है माँ, चिलचिलाती धूप में छांव जैसा सहारा है माँ। हर पीड़ा, हर तकलीफ मिटा दे माँ, अपने आँचल से सारी थकान हटा दे माँ। हमारे दर्द पर खुद करहा जाए माँ, दवा का स्वाद पहले खुद चखे, फिर हमें पिलाये माँ। घुटनों से रेंगते-रेंगते कब पैरों पर खड़ा हुआ, तेरी ममता की छांव में माँ जाने कब बड़ा हुआ। सीधा-साधा, भोला-भाला मैं ही सबसे अच्छा हूँ, कितना भी हो जाऊं बड़ा माँ, आज भी तेरा बच्चा हूँ। अपनी हर ख्वाहिश खुद पाले माँ, बच्चों के लिए खुद का हर अरमान छुपा ले माँ। #poetry #poem
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