असली सोना और लोहार (घमंड का फल) एक गाँव में एक बहुत अमीर सुनार रहता था। उसे अपने सोने के गहनों और अपनी अमीरी पर बहुत घमंड था। वह अक्सर गाँव के गरीब लोहार का मज़ाक उड़ाता था और कहता था, "तुम दिनभर काले लोहे को पीटते हो, तुम्हारी कोई इज़्ज़त नहीं है। मेरी दुकान पर देखो, लोग सर झुकाकर सोना खरीदते हैं।" लोहार शांत रहता और अपनी मेहनत करता रहता। एक दिन पूरे राज्य में भयंकर अकाल और युद्ध की स्थिति बन गई। डाकू गाँव की तरफ बढ़ने लगे। सुनार ने डर के मारे अपनी सारी धन-दौलत और सोना एक भारी संदूक में बंद कर दिया। जब डाकू गाँव में घुसे, तो उन्होंने सबसे पहले सुनार की दुकान लूटी और उसका सारा सोना ले गए। सुनार रोता हुआ लोहार की कुटिया पर पहुँचा। उसने देखा कि लोहार ने अपने लोहे के औजारों से एक मजबूत दरवाज़ा और सुरक्षा के हथियार बना लिए थे, जिससे वह और उसका परिवार सुरक्षित थे। लोहार ने सुनार से कहा, "मुसीबत के समय सोने की चमक नहीं, बल्कि लोहे की मज़बूती काम आती है।" सीख (Moral): किसी भी इंसान या चीज़ को छोटा नहीं समझना चाहिए। दिखावे की चमक से ज्यादा उपयोगिता और मेहनत का महत्व होता है। #story #equality
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