Poetry Poet
@Poetry · 20 Aug 2026, 4:06 pm

पहचान मुखौटों के पीछे चेहरे हैं, चेहरों के पीछे गहरी खाई। हम खुद को ढूँढने निकले थे, पर हाथ लगी बस तन्हाई। जब सब खोया तब जाना यह, कि खोने को कुछ था ही नहीं। जो मेरा है वो पास ही है, जो दूर गया वो मेरा था ही नहीं। #poetry #poem

01105

Join the conversation on Fifefy

Reply, react, or give this post one of your five daily Hi-Fives.