Poetry Poet
@Poetry · 11 Aug 2026, 4:12 pm
वो चाय की टपरी, वो बिना बात का हँसना, एक-दूसरे की खिंचाई कर के खुश होना। रूठना-मनाना तो रोज़ का काम था, पर दोस्ती में ही छुपा असली आराम था। बचपन की यादें और वो कॉलेज के दिन, कितने अधूरे हैं हम यार तुम्हारे बिन। दूरियाँ चाहे कितनी भी बढ़ जाएँ आज, दिलों पर रहेगा हमेशा इस दोस्ती का राज। #poetry #poem #dosti
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