Bhakti Sagar
@bhakti · 1 Nov 2026, 12:36 pm

अहोई अष्टमी व्रत की पौराणिक कथा एक प्राचीन नगर में एक धनी साहूकार रहता था। उसके सात बेटे, सात बहुएं और एक प्यारी सी बेटी थी। दीपावली के त्योहार से कुछ दिन पहले घर की पुताई और लीपापोती के लिए मिट्टी की जरूरत थी। साहूकार की सातों बहुएं और उसकी इकलौती बेटी जंगल के पास खदान में मिट्टी खोदने गईं। जब सब वहां मिट्टी खोद रही थीं, तभी साहूकार की बेटी की खुरपी/कुदाल गलती से वहां बैठी एक स्याहू (सेई) के बच्चे को लग गई, जिससे उसकी वहीं मृत्यु हो गई। अपने हाथ से बच्चे की मृत्यु हो जाने पर स्याहू माता बहुत क्रोधित हुईं और उन्होंने साहूकार की बेटी को शाप दिया— "मैं तेरी कोख बांधती हूँ।" डर के मारे उस लड़की ने घर आकर अपनी भाभियों को यह बात बताई और रोने लगी। उसने अपनी भाभियों से कहा कि तुम में से कोई एक इस शाप को अपने ऊपर ले लो। सबने मना कर दिया, लेकिन दयालु और सहनशील सबसे छोटी बहू ने ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने की सहमति दे दी। शाप के कारण सबसे छोटी बहू के जो भी बच्चे होते, वे जन्म के कुछ ही दिनों (सातवें दिन) में मर जाते। इससे वह बहुत दुखी रहने लगी। परेशान होकर उसने एक ज्ञानी पंडित को बुलाकर इसका कारण पूछा। पंडित जी ने बताया कि स्याहू माता की सहेली सुरही गाय है, तुम उसकी नियमित रूप से सुबह उठकर सेवा करो। छोटी बहू हर रोज सुबह चुपचाप उठकर सुरही गाय के नीचे साफ-सफाई करती और उसे घास खिलाती। एक दिन सुरही गाय ने सोचा कि इतनी सुबह आकर मेरी सेवा कौन करता है? वह जल्दी जाग गई और उसने छोटी बहू को देख लिया। प्रसन्न होकर गाय ने कहा कि जो चाहो मांगो। तब बहू ने अपनी पीड़ा सुनाई। सुरही गाय उसे लेकर सात समुद्र पार स्याहू माता के पास जाने लगी। रास्ते में बहुत धूप थी, इसलिए दोनों एक पेड़ के नीचे रुक गईं। तभी उसने देखा कि उसी पेड़ पर बने घोंसले में गरुड़ पंखनी के बच्चे को एक सांप डसने जा रहा है। छोटी बहू ने तुरंत डंडे से सांप को मार गिराया और गरुड़ के बच्चे की जान बचाई। थोड़ी देर बाद जब गरुड़ पंखनी वहां आई और खून देखा, तो उसे लगा कि इस स्त्री ने उसके बच्चे को मारा है। वह गुस्से में चोंच मारने लगी। तब छोटी बहू ने पूरी सच्चाई बताई। गरुड़ पंखनी बहुत प्रसन्न हुई और उसने कृतज्ञता स्वरूप दोनों को अपनी पीठ पर बैठाकर स्याहू माता के पास पहुंचा दिया। #bhakti See comments for more...

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  • Bhakti Sagar
    @bhakti · 1 Nov 2026, 12:38 pm

    स्याहू माता के पास पहुंचकर छोटी बहू नेउनके सिर की जुएं साफ कीं। उसकी सेवा से प्रसन्न होकर स्याहू माता बोलीं— "तूने मेरे सिर को बहुत ठंडक पहुंचाई है, जा तेरे सात बेटे और सात बहुएं होंगी।" छोटी बहू रोते हुए बोली— "माता, मेरी कोख तो आपके पास बंद पड़ी है, मेरे सात बेटे कहां से होंगे?" तब स्याहू माता को अहसास हुआ कि यह तो साहूकार की वही छोटी बहू है जिसने सेवा से उसे मना लिया है। उन्होंने अपना वचन दोहराया और कहा कि तू घर जा, तेरे घर में सात पुत्र और बहुएं मिलेंगी।