दो घड़े (अपूर्णता की खूबसूरती) एक पानी भरने वाले के पास दो बड़े घड़े थे, जिन्हें वह डंडे के दोनों सिरों पर लटकाकर नदी से पानी लाता था। उनमें से एक घड़ा थोड़ा फूटा हुआ (क्रैक) था, जबकि दूसरा बिल्कुल सही था। हर बार जब वह घर पहुँचता, तो फूटे घड़े से पानी टपकने के कारण उसमें केवल आधा पानी ही बचता था।सही घड़े को खुद पर गर्व था, जबकि फूटा घड़ा अपनी इस कमी से बहुत दुखी और शर्मिंदा रहता था। एक दिन फूटे घड़े ने पानी भरने वाले से कहा, "मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ क्योंकि मेरी कमी के कारण आपकी मेहनत बेकार चली जाती है।" पानी भरने वाले ने मुस्कुराते हुए कहा, "क्या तुमने ध्यान दिया कि जिस तरफ से तुम आते हो, उस रास्ते पर कितने सुंदर फूल खिले हैं, लेकिन दूसरे घड़े की तरफ का रास्ता सूखा है? मुझे तुम्हारी कमी पता थी, इसलिए मैंने तुम्हारी तरफ के रास्ते पर फूलों के बीज बो दिए थे। तुम रोज़ उन बीजों को सींचते रहे और आज तुम्हारी वजह से यह पूरा रास्ता इतना सुंदर बन गया है।" सीख: इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति या चीज़ बेकार नहीं होती। हमारी कमियाँ भी किसी न किसी रूप में वरदान साबित हो सकती हैं। #usefulness
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