कहानी - आखिरी घंटी भाग ३: अदालत का जाल समीर खन्ना को सलाखों के पीछे पहुंचे एक हफ्ता हो चुका था। राघव और अंजलि ने मिलकर उसके खिलाफ पुख्ता सबूत तैयार किए थे। विमल खन्ना के कत्ल और सब-इन्स्पेक्टर अमित की हत्या के आरोप में समीर का जेल से छूटना नामुमकिन लग रहा था। मामला शहर की सबसे बड़ी अदालत में पहुंचा। समीर की तरफ से पैरवी करने के लिए देश के सबसे महंगे और शातिर वकील, डिफेंस लॉयर के.के. सिंघानिया खड़े हुए थे। सिंघानिया ने आज तक कोई केस नहीं हारा था।सुनवाई शुरू हुई। राघव व्हीलचेयर पर बैठे (पैर की चोट के कारण) गवाही के कटघरे में आया। उसने मिल की उस रात की पूरी दास्तान अदालत के सामने रख दी। अंजलि ने मिल से बरामद समीर की बंदूक और फॉरेंसिक रिपोर्ट जज साहब के सामने पेश की। सब कुछ पुलिस के पक्ष में था। लेकिन तभी एडवोकेट सिंघानिया के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आई। सिंघानिया ने जज की तरफ देखते हुए कहा, "योर ऑनर, पुलिस की थ्योरी सुनने में बहुत अच्छी है, लेकिन यह पूरी तरह झूठी है। मेरे मुवक्किल समीर खन्ना को इस केस में फंसाया जा रहा है और इसे साबित करने के लिए मैं अदालत के सामने एक नया गवाह और एक नया सबूत पेश करना चाहता हूँ।" सिंघानिया ने कोर्ट रूम के दरवाजे की तरफ इशारा किया। दरवाजा खुला और अंदर जो शख्स आया, उसे देखकर राघव और अंजलि के होश उड़ गए। वह सब-इन्स्पेक्टर अमित था! वही अमित, जिसे राघव के सामने समीर ने सिर में गोली मारी थी। अमित के सिर पर पट्टी बंधी हुई थी, लेकिन वह जिंदा था और अपने पैरों पर चलकर कोर्ट रूम में आ रहा था। "योर ऑनर," सिंघानिया ने गरजना शुरू किया, "अमित मरा नहीं था। गोली उसके सिर को सिर्फ छूकर गुजरी थी। और अमित पुलिस कस्टडी में नहीं, बल्कि अपनी जान बचाने के लिए मेरे पास छुपा हुआ था। क्योंकि असली कातिल समीर खन्ना नहीं... बल्कि खुद इंस्पेक्टर राघव हैं!" पूरे कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया। राघव ने चिल्लाकर कहा, "यह झूठ है! अमित, तुम यह क्या बकवास कर रहे हो?" जज ने हथौड़ा बजाया, "ऑर्डर! ऑर्डर! अमित, अपना बयान दर्ज कराओ।" अमित ने राघव की तरफ उंगली उठाई और कहा, "योर ऑनर, विमल खन्ना को इंस्पेक्टर राघव ने मारा था क्योंकि विमल खन्ना के पास राघव के ड्रग कार्टेल से जुड़े होने के सबूत थे। उस रात मिल में राघव ने मुझे और समीर खन्ना को जान से मारने के लिए बुलाया था।
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Story Telling@Story · 13 Aug 2026, 6:54 amउन्होंने मुझे गोली मारी, लेकिन मैं खुशकिस्मत था कि बच गया।" तभी सिंघानिया ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग प्ले की। उसमें राघव की आवाज़ थी, जो विमल खन्ना को धमकी दे रहा था और ड्रग्स के पैसों का हिसाब मांग रहा था। वह आवाज़ हूबहू राघव की थी। राघव समझ गया कि यह वही वॉयस-क्लोनिंग डिवाइस का कमाल था जो अमित के पास था। जज ने सख्त लहजे में कहा, "इस नए मोड़ को देखते हुए, यह अदालत समीर खन्ना को जमानत पर रिहा करती है और इंस्पेक्टर राघव को तुरंत हिरासत में लेने का आदेश देती है।"
