Poetry Poet
@Poetry · 13 Aug 2026, 3:53 am
शीर्षक: मोबाइल का मायाजाल सुबह आँख खुलते ही, प्रभु के नहीं दर्शन होते, ढूंढते हैं सब मोबाइल, जैसे हों होश खोते। व्हाट्सएप की चैटिंग में, पूरी सुबह कट जाती है, चाय ठंडी हो जाती है, पर उंगली चलती जाती है। बिना सोचे-समझे हम, रील्स स्क्रॉल करते हैं, डांस देखकर दूसरों का, खुद आहें भरते हैं। भूल गए हैं सब अब तो, आपस में बात करना, बस इमोजी भेजकर ही, पड़ता है अब तो जीना। फोन की बैटरी जो कभी, लाल निशान पर आ जाए, अच्छे-भले इंसान को भी, वो हार्ट अटैक दिलाए। चार्जर ढूंढने में सब, ऐसे दौड़ लगाते हैं, जैसे बॉर्डर पर सैनिक, दुश्मन को भगाते हैं। #poem #comedy
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