Poetry Poet
@Poetry · 18 Aug 2026, 4:11 pm
चिन्ता को छोड़, चिंतन कर (Shift from Worrying to Thinking) चिन्ता की यह आग तो, अन्दर ही अन्दर जलाएगी, शांति से सोचेगा अगर, राह नई दिख जाएगी। वक़्त का पहिया चलता है, मुश्किल भी कट जाएगी, आज जो काली रात है, कल सुबह मुस्कराएगी। मत सोच तू इतना ज़्यादा, जो होना है वो होगा ही, कर्म कर अपना तू बस, मन का बोझ तो खोगा ही। #poetry #poem
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