Poetry Poet
@Poetry · 15 Aug 2026, 2:25 pm

सज गई सावन की कजरी अरे झूला तो पड़ गए सावन की डार पे, सखियाँ बुलावे आजा रे मल्हार पे! रिमझिम-रिमझिम मेघा बरसे, पवन चले पुरवैया, हरे-भरे बागों में नाचे, मोरा मनवा ता ता थैया। मेहंदी रची है गोरी के हाथ, खनक रही शहनाई, हरी-हरी चूड़ियों की खनक ने, कैसी धूम मचाई! धानी चुनरिया ओढ़ के गोरी, मंदिर की ओर चाली, पार्वती-शिव का वंदन करके, माँगे सुहाग की लाली। सास-ननद सब मिलके गावे, घेवर की थाली सजी, सखियों की टोली में देखो, मधुर बाँसुरी बाजी। आयो रे आयो हरियाली तीज, खुशियाँ अपार लाया, सावन का ये पावन मेला, जन-जन के मन को भाया! #poetry #lokgeet

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