गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति कृतज्ञता, श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का सबसे बड़ा दिन है। सनातन संस्कृति में गुरु को भगवान से भी ऊपर स्थान दिया गया है क्योंकि वही हमें अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पावन पर्व हर साल आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। 📜 गुरु पूर्णिमा का इतिहास (History) गुरु पूर्णिमा की शुरुआत और इसके इतिहास से कई महत्वपूर्ण पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं जुड़ी हुई हैं: महर्षि वेदव्यास की जयंती (व्यास पूर्णिमा): धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन महाभारत के रचयिता महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों को चार भागों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद) में विभाजित किया और 18 पुराणों की रचना की। सनातन धर्म में उन्हें 'आदि गुरु' (प्रथम गुरु) माना जाता है, इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। भगवान शिव बने प्रथम गुरु: योगिक परंपरा के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव (आदि योगी) ने अपनी तपस्या पूरी कर सप्तऋषियों को योग और आत्मज्ञान का उपदेश दिया था। इस प्रकार शिव जगत के पहले गुरु बने। भगवान बुद्ध का प्रथम उपदेश (बौद्ध धर्म): बौद्ध मान्यताओं के अनुसार, ज्ञान प्राप्ति के बाद गौतम बुद्ध ने इसी पूर्णिमा के दिन उत्तर प्रदेश के सारनाथ में अपने पहले पांच शिष्यों को उपदेश दिया था, जिसे 'धर्मचक्र प्रवर्तन' कहा जाता है। भगवान महावीर और जैन धर्म: जैन परंपरा में माना जाता है कि इसी दिन चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर ने अपने पहले शिष्य गौतम स्वामी को दीक्षा दी थी और गुरु-शिष्य परंपरा की शुरुआत की थी। #gurupurnima #gratitide #respect #blessings
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