पूतना वध (पहली राक्षसी का उद्धार) जब कंस को पता चला कि उसका वध करने वाला बालक गोकुल में जनम ले चुका है, तो उसने सभी नवजात शिशुओं को मारने के लिए पूतना नाम की एक भयानक राक्षसी को भेजा। पूतना रूप बदलने में माहिर थी। वह एक बेहद सुंदर और ममतामयी स्त्री का रूप धारण करके गोकुल में नंद बाबा के महल में घुस गई। उसने अपने स्तनों पर भयंकर विष लगा रखा था। महल में सब लोग उसकी सुंदरता को देखकर धोखा खा गए। पूतना ने बहाने से नन्हे कान्हा को अपनी गोद में उठा लिया और उन्हें अपना जहरीला दूध पिलाने लगी। साक्षात भगवान कृष्ण सब जानते थे। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं और दूध पीने के बहाने पूतना के प्राणों को ही खींचना शुरू कर दिया। कुछ ही पलों में पूतना का राक्षसी रूप बाहर आ गया और वह दर्द से तड़पने लगी। उसने चिल्लाते हुए कहा, "मुझे छोड़ दो! मुझे छोड़ दो!" लेकिन कान्हा ने अपनी पकड़ नहीं छोड़ी। अंततः पूतना का विशाल शरीर जमीन पर गिर पड़ा और उसके प्राण पखेरू उड़ गए। भगवान ने उसे मार कर भी एक माता की तरह उसका उद्धार कर दिया। #story
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