मायावी पेंटिंग (शैली: रहस्य/सस्पेंस) विक्रम को पुरानी और दुर्लभ कलाकृतियाँ इकट्ठा करने का शौक था। एक दिन उसे शहर के एक कोने में स्थित पुरानी दुकान पर कैनवास की एक धूल भरी पेंटिंग मिली। उस पेंटिंग में एक सुनसान सड़क के किनारे एक पुराना, अकेला लैंपपोस्ट बना हुआ था। पेंटिंग की सबसे अजीब बात यह थी कि लैंपपोस्ट की रोशनी इतनी जीवंत थी कि लगता था सच में जल रही हो। विक्रम ने बिना मोल-भाव किए उसे खरीद लिया और अपने बेडरूम में लगा दिया। उस रात जब विक्रम सोने गया, तो कमरे की लाइट बंद करने के बाद भी उसे हल्का उजाला महसूस हुआ। उसने देखा कि पेंटिंग का लैंपपोस्ट पहले से ज़्यादा चमक रहा था। हैरान होकर वह उठ बैठा और पेंटिंग के करीब गया। उसके होश उड़ गए जब उसने देखा कि पेंटिंग में लैंपपोस्ट के नीचे अब एक परछाई खड़ी थी, जो शाम को वहाँ नहीं थी। विक्रम ने अपनी आँखें मलीं। वह परछाईं धीरे-धीरे कैनवास पर आगे बढ़ रही थी। देखते ही देखते, वह आकृति पेंटिंग के फ्रेम के बिल्कुल किनारे तक आ गई। विक्रम डर के मारे पीछे हटा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पेंटिंग के भीतर से एक ठंडा, बर्फीला हाथ बाहर निकला और उसने विक्रम का कॉलर पकड़ लिया। अगली सुबह, विक्रम के घर का नौकर जब कमरे की सफ़ाई करने आया, तो कमरा खाली था। विक्रम कहीं नहीं था। नौकर की नज़र दीवार पर टंगी उसी पेंटिंग पर पड़ी। अब उस पेंटिंग में लैंपपोस्ट के नीचे दो परछाइयाँ हाथ पकड़े खड़ी थीं, और उनमें से एक परछाई का हुलिया बिल्कुल विक्रम जैसा था। ------------------------------ #story
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