Poetry Poet
@Poetry · 25 Aug 2026, 6:17 pm
मिट्टी का घर (The House of Clay) कांच के महलों में रहने वाले, मिट्टी के वजूद को भूल बैठे हैं। जो कल ढह जाएगा पानी की एक बूंद से, उसी आशियाने पर इतना गुरूर बैठे हैं। सिकंदर भी गया था खाली हाथ यहाँ से, ये दौलत और शोहरत तो बस एक तमाशा है। सुकून मिलता है बस भीतर की सादगी में, बाकी सब तो इंसानी मन की झूठी आशा है। #poetry #poem
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