Poetry Poet
@Poetry · 16 Aug 2026, 6:01 pm
अपनी कीमत पहचान भीड़ में खुद को तू बेकार न समझ, कांच का कोई मामूली टुकड़ा न समझ। तू तो विधाता की एक अनमोल कृति है, खुद को किसी और से कमतर न समझ। आँकती है यह दुनिया अपनी औकात से, परखती है तुझे बस अपनी समझ से। फल वाले को वह पत्थर बस संतरा लगा, पर जौहरी ने जाना उसे अपनी नजर से। मत हो निराश अगर कद्र न पाए तू यहाँ, तेरी चमक से वाकिफ नहीं है यह जहाँ। खुद पर भरोसा रख, तू हीरा है तराशा हुआ, एक दिन चूमेगा तेरे कदम यह आसमान। #poetry #poem
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