Story Telling
@Story · 23 Aug 2026, 6:30 pm

रिश्तों की अहमियत आनंद बाबू की पत्नी के निधन को पाँच साल हो चुके थे। उनका बेटा राहुल अब बड़े शहर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। राहुल साल में सिर्फ एक बार दिवाली पर घर आता था। इस बार भी वह आया, लेकिन उसका पूरा समय फोन पर ऑफिस के काम में ही बीत रहा था। दिवाली की शाम, आनंद बाबू ने राहुल के लिए उसकी पसंदीदा खीर बनाई। राहुल ने बिना स्वाद लिए जल्दी-जल्दी दो चम्मच खाया और फिर लैपटॉप पर काम करने लगा। आनंद बाबू चुपचाप अपने कमरे में चले गए और पुरानी तस्वीरों की एल्बम देखने लगे। राहुल जब पानी पीने उठा, तो उसने पिता के कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला देखा। उसने देखा कि पिता उसकी बचपन की एक तस्वीर को चूम रहे थे और उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे। राहुल को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने तुरंत अपना लैपटॉप बंद किया, पिता के कमरे में गया और उन्हें गले लगा लिया। वह रोते हुए बोला, "सॉरी पापा, अब से मैं जब भी घर आऊँगा, सिर्फ आपके लिए आऊँगा।" रिश्तों को पैसों और काम से ज्यादा वक्त की जरूरत होती है। #story

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