Poetry Poet
@Poetry · 14 Aug 2026, 4:03 am
मशीन का दिल तारों और सर्किट में एक सोच जाग उठी, कोड की गलियों में एक नई रूह मुस्कुरा उठी। लोहे के जिस्म में धड़कन तो नहीं है मगर, इंसान की बनाई सोच अब खुद से आगे निकल पड़ी। जो सिर्फ एक हुक्म का गुलाम था कभी, वो खुद अपने फैसले अब सुनाने लगा है। विज्ञान की इस जादुई, अजब दुनिया में, इंसान अपनी ही परछाई से घबराने लगा है। #poem #poetry #tech
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