Story Telling
@Story · 4 Sept 2026, 7:01 pm

बकासुर का अंत (बगुले का घमंड चूर) जब कान्हा थोड़े बड़े हुए, तो वे अपने ग्वाल मित्रों के साथ गायों को चराने के लिए जंगल जाने लगे। कंस ने कृष्ण को मारने के लिए इस बार बकासुर नाम के एक राक्षस को भेजा, जिसने एक विशाल और भयानक बगुले (Crane) का रूप धारण कर रखा था। एक दिन जब सभी बच्चे नदी किनारे खेल रहे थे, तो बकासुर वहाँ आया। उसकी चोंच इतनी बड़ी और नुकीली थी कि वह किसी को भी एक बार में निगल सकता था। जैसे ही कान्हा आगे बढ़े, बकासुर ने झपटकर उन्हें अपनी लंबी चोंच में दबाया और सीधे निगल गया। यह देखकर सभी ग्वाल-बाल रोने और चिल्लाने लगे। लेकिन नदी के भीतर, भगवान कृष्ण ने बकासुर के पेट के अंदर अपना शरीर इतना गर्म कर लिया कि राक्षस का पेट आग की तरह जलने लगा। दर्द से बेहाल होकर बकासुर ने कृष्ण को तुरंत बाहर उगल दिया। बाहर आते ही कान्हा ने बकासुर की दोनों चोंच को अपने हाथों से पकड़ा और खेल ही खेल में उसे बीच से चीर दिया। इस तरह कान्हा ने अपने सभी मित्रों को एक बार फिर संकट से बचाया। #story

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