Poetry Poet
@Poetry · 12 Aug 2026, 1:16 pm

स्मार्टफोन का अत्याचार सुबह उठते ही हाथ में, आता है मोबाइल, भूल गए हैं लोग अब, अपनों की स्माइल। बाथरूम में भी साथ जाता है, यह छोटा शैतान, रील देखते-देखते, बीत जाता है हर काम। चार्जिंग खत्म होते ही, छा जाता है सन्नाटा, जैसे किसी ने जेब से, सारा पैसा काटा। ऊपर वाला बचाए हमें, इस डिजिटल बीमारी से, वरना रिश्ता टूट जाएगा, पूरी दुनियादारी से! #poem #comedy #harshreality

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