जादू की बांसुरी (शैली: फैंटेसी / जादुई) सुंदरवन के घने जंगलों के बीच चंदन नाम का एक गरीब चरवाहा रहता था। वह दिनभर अपनी बकरियाँ चराता और शाम को बांस के पेड़ों के नीचे बैठकर अपनी पुरानी बांसुरी बजाता था। उसकी बांसुरी की धुन साधारण थी, लेकिन उसमें एक अजीब सा दर्द और सुकून था। एक दिन, जब चंदन एक झरने के पास बांसुरी बजा रहा था, तो पानी में से एक सुंदर जलपरी प्रकट हुई। उसके बाल सुनहरे थे और उसकी पूँछ नीलमणि की तरह चमक रही थी। जलपरी ने कहा, "चंदन, तुम्हारी धुन ने मेरे दिल को छू लिया है। मैं तुम्हें एक वरदान देना चाहती हूँ।" उसने चंदन को एक सोने की जादुई बांसुरी दी और कहा, "इसे जब भी बजाओगे, सूखी धरती पर हरियाली आ जाएगी और बीमार लोग ठीक हो जाएंगे। लेकिन याद रखना, इसे कभी लालच में मत बजाना।" चंदन ने उस बांसुरी से पूरे गाँव की गरीबी दूर कर दी। फसलें लहलहा उठीं और बीमारियाँ गायब हो गईं। लेकिन गाँव के ज़मींदार को इस जादुई बांसुरी का पता चल गया। उसने रात में अपने गुंडों से वह बांसुरी चुरा ली। ज़मींदार ने सोने के सिक्के बरसाने की उम्मीद में बांसुरी को जोर से बजाया। लेकिन लालच की वजह से बांसुरी से मधुर संगीत के बजाय एक भयानक चीख निकली। देखते ही देखते ज़मींदार का महल पत्थरों में बदल गया और बांसुरी खुद ब खुद गायब होकर वापस चंदन के पास पहुँच गई। सच्चा जादू सोने में नहीं, बल्कि साफ दिल की धुन में था। #story
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