सच्ची पुकार एक छोटा सा गांव था। वहां माधव नाम का एक गरीब मोची रहता था। वह दिनभर फटे-पुराने जूते सीता और भगवान के भजन गाता रहता। उसके पास जो भी रूखा-सूखा भोजन होता, वह पहले भगवान को भोग लगाता, फिर खुद खाता। एक दिन गांव में बहुत बड़े पंडित जी आए। वे बहुत विद्वान थे। माधव उनके पास गया और हाथ जोड़कर बोला, "पंडित जी, मुझे कोई बड़ा मंत्र सिखाइए जिससे भगवान जल्दी प्रसन्न हो जाएं।" पंडित जी ने माधव के फटे कपड़े और उसकी सादगी देखी। वे मुस्कुराए और बोले, "माधव, भगवान किसी कठिन मंत्र से नहीं, केवल सच्चे प्रेम से मिलते हैं। तुम जब भी खाना खाओ, बस दिल से कह देना—_हे प्रभु, पहले आप पालो, फिर मैं पाऊँ_। भगवान तुम्हारी पुकार सुन लेंगे।" माधव ने इस बात को गांठ बांध लिया। वह रोज खाना खाने से पहले आंखें बंद करता और पूरे समर्पण से भगवान को बुलाता। एक रात बहुत तेज बारिश हो रही थी। माधव अपनी कुटिया में बैठा था। उसने खाने की थाली सामने रखी और आंखें बंद करके कहा, "हे प्रभु! बहुत ठंड है, बाहर तेज बारिश है। आप जल्दी आइए और भोग लगाइए।" तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। माधव ने दरवाजा खोला। सामने एक बूढ़ा, भूखा भिखारी खड़ा था, जो ठंड से कांप रहा था। माधव ने बिना कुछ सोचे उस बूढ़े व्यक्ति को अंदर बुलाया। उन्हें अपनी चटाई पर बिठाया, आग जलाई और अपनी भोजन की थाली उनके सामने रख दी। बूढ़े व्यक्ति ने तृप्त होकर खाना खाया और मुस्कुराते हुए माधव के सिर पर हाथ रखा। देखते ही देखते, उस कुटिया में एक अलौकिक प्रकाश फैल गया। वह भिखारी कोई और नहीं, स्वयं भगवान नारायण थे। भगवान ने कहा, "माधव! तुम्हारी भक्ति और निश्छल प्रेम ने मुझे खींच लिया। जो भूखे को अन्न खिलाता है, वह सीधे मुझ तक पहुंचता है।" माधव की आंखों से आंसू बहने लगे। वह भगवान के चरणों में गिर गया। सीख: भगवान केवल भाव के भूखे हैं। किसी भूखे या जरूरतमंद की सेवा करना ही ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा है। #bhakti #bhav
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