माटी खाने की लीला (मुख में ब्रह्मांड) गोकुल की गलियों में नन्हे कान्हा अपने मित्रों के साथ खेल रहे थे। खेलते-खेलते उन्होंने जमीन से एक मुट्ठी मिट्टी उठाकर अपने मुँह में डाल ली। जब ग्वाल-बालों ने यह देखा, तो उन्होंने जाकर माता यशोदा से शिकायत कर दी, "मैया, कान्हा ने माटी खाई है!" यशोदा मैया तुरंत दौड़कर आईं और गुस्से में कान्हा का हाथ पकड़कर बोलीं, "कन्हैया! तूने माटी क्यों खाई? चल, अपना मुँह खोल!" नन्हे कृष्ण ने डरने का नाटक किया और अपनी बड़ी-बड़ी आँखें घुमाते हुए ना में सिर हिलाया। मैया के बार-बार डांटने पर जैसे ही कान्हा ने अपना छोटा सा मुँह खोला, माता यशोदा आश्चर्य से जड़ रह गईं। कान्हा के उस नन्हे से मुख के भीतर कोई मिट्टी नहीं थी, बल्कि पूरा ब्रह्मांड दिखाई दे रहा था। उसमें सारे ग्रह, नक्षत्र, नदियाँ, समुद्र, पर्वत और स्वयं माता यशोदा भी दिखाई दे रही थीं। मैया समझ गईं कि उनका लल्ला कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि साक्षात ईश्वर है। भगवान ने तुरंत अपनी माया फैलाई और मैया इस बात को भूलकर फिर से कान्हा को गले से लगा बैठीं। #story
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