Poetry Poet
@Poetry · 15 Aug 2026, 2:20 pm

शहादत का कफ़न (The Shroud of Martyrdom) तिरंगा ओढ़ कर जो सो गया है, वो अमरता के साए में खो गया है। मिटा कर खुद को देश बचा गया वो, सच्ची वफ़ा का फर्ज निभा गया वो। सूनी गोद हुई, छूटा सिंदूर कहीं, पर उस जैसा कोई खुशनसीब नहीं। शहादत की राह पर जो कदम बढ़ते हैं, इतिहास के पन्नों पर वो अमर होते हैं। #poetry #poem #immortality

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