मौन दर्शक ट्रेन के जनरल डिब्बे में भारी भीड़ थी। एक कोने वाली सीट पर कुछ लड़के जोर-जोर से अश्लील गाने बजा रहे थे और आने-जाने वाली महिलाओं पर फब्तियां कस रहे थे। डिब्बे में बैठे बाकी वयस्क पुरुष या तो अखबार पढ़ने का नाटक कर रहे थे या फोन में व्यस्त थे। सबने 'अपने काम से काम' रखने की ठान रखी थी।तभी एक 60 साल के बुजुर्ग उठ खड़े हुए। उन्होंने लड़कों के पास जाकर कड़क आवाज में कहा, "गाने बंद करो और तमीज से बैठो, वरना अगले स्टेशन पर पुलिस बुलाता हूँ।" लड़के सकपका गए और उन्होंने फोन बंद कर लिया। बुजुर्ग की हिम्मत देखकर बाकी लोग भी उनके समर्थन में खड़े हो गए और लड़कों को डांटने लगे। एक युवक ने बुजुर्ग से कहा, "बाबा, आपको डर नहीं लगा?" बुजुर्ग ने हंसकर कहा, "डर तो तब लगता जब इस डिब्बे में सिर्फ मैं अकेला इंसान होता। यहाँ तो सब इंसान थे, बस जागने का इंतजार कर रहे थे।" सीख: बुराई की ताकत सिर्फ इतनी ही है कि अच्छाई चुप रहने का फैसला कर लेती है। गलत के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का फर्ज है।
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