जैसी दृष्टि, वैसी सृष्टि (नकारात्मकता का बोझ) एक बार एक गुरु ने अपने शिष्य को एक खाली बर्तन दिया और कहा, "जाओ, इसमें बगीचे से सबसे सुंदर फूल चुनकर लाओ।"शिष्य बगीचे में गया। उसे वहाँ कई सुंदर फूल दिखे, लेकिन साथ ही उसे सूखे पत्ते, कांटे और कीचड़ भी दिखाई दिया। वह हर सुंदर फूल को छोड़ देता क्योंकि उसके पास कोई न कोई कांटा या कमी दिख जाती। अंत में, वह खाली बर्तन लेकर वापस लौट आया और बोला, "गुरुजी, वहाँ बहुत सारे कांटे और गंदगी थी, इसलिए मुझे कोई पूरी तरह से सुंदर फूल नहीं मिला।"गुरु मुस्कुराए और दूसरे शिष्य को भेजा। दूसरा शिष्य कुछ ही देर में सुगंधित और सुंदर फूलों से बर्तन भरकर ले आया। गुरु ने पहले शिष्य से कहा, "बगीचा वही था, लेकिन तुम्हारी नजर सिर्फ कांटों पर थी और इसकी नजर सिर्फ फूलों पर। जीवन में तुम वही पाओगे, जिसे तुम देखना चाहोगे।" सीख: जीवन में कमियाँ ढूंढने के बजाय अच्छाइयों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। #positivity
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