Poetry Poet
@Poetry · 20 Aug 2026, 4:03 pm
मौन और शोर जो कह न सके वो गहरा था, जो बोल दिया वो सतही है। इस शोर भरे बाज़ार में, बस मौन ही सबसे सही है। हम ढूँढ रहे हैं बाहर जिसे, वो भीतर कहीं सो रहा है। जो खो गया वो तो मिट्टी था, जो बचा है वही सब कुछ हो रहा है। #poem #poetry
0902
Join the conversation on Fifefy
Reply, react, or give this post one of your five daily Hi-Fives.
