शीर्षक: आख़िरी घंटी रात के ठीक बारह बजे इंस्पेक्टर राघव के फोन की घंटी बजी। वह थका हुआ था, लेकिन स्क्रीन पर चमक रहे नंबर को देखकर उसकी नींद गायब हो गई। यह नंबर शहर के सबसे बड़े बिजनेसमैन, विमल खन्ना का था, जिनकी तीन दिन पहले हत्या हो चुकी थी और उनका फोन पुलिस मालखाने में बंद था। राघव ने कांपते हाथों से फोन उठाया। दूसरी तरफ से गहरी सांसों की आवाज आ रही थी, और फिर एक ठंडी, भारी आवाज गूंजी, "राघव... जिसे तुमने जेल में डाला है, वह बेकसूर है। असली कातिल तुम्हारे बहुत करीब है। अगर सच जानना है, तो अभी पुरानी मिल में अकेले आओ।" कॉल कट गई। राघव ने तुरंत मालखाने के इंचार्ज को फोन किया। इंचार्ज ने घबराते हुए बताया कि विमल खन्ना का फोन अपनी जगह पर सुरक्षित रखा है और पूरी तरह स्विच ऑफ है। राघव के माथे पर पसीना आ गया। अगर फोन मालखाने में है, तो कॉल कहाँ से आई? बिना वक्त गंवाए, राघव अपनी कार लेकर पुरानी मिल की तरफ भागा। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी। मिल के अंदर चारों तरफ सन्नाटा और अंधेरा था। राघव ने अपनी टॉर्च जलाई और अंदर बढ़ा। तभी उसे मिल के ऊपरी हिस्से से किसी के चलने की आहट सुनाई दी। वह धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ने लगा। ऊपर पहुंचते ही टॉर्च की रोशनी एक कुर्सी पर पड़ी। उस पर एक आदमी बंधा हुआ था और उसके सिर पर काला कपड़ा था। राघव ने लपककर कपड़ा हटाया। सामने विमल खन्ना का इकलौता बेटा, समीर खन्ना था। वह बुरी तरह डरा हुआ था। "समीर! तुम यहाँ कैसे?" राघव ने पूछा। समीर ने रोते हुए कहा, "इंस्पेक्टर... मुझे किसी ने किडनैप किया और यहाँ बांध दिया। उसने मुझसे कहा कि वह मेरे पिता के असली कातिल को यहाँ बुला रहा है।" तभी अंधेरे में से एक जोरदार हंसी की आवाज गूंजी। राघव ने तुरंत अपनी बंदूक तान दी, "कौन है वहाँ? सामने आओ!" अंधेरे से जो चेहरा बाहर निकला, उसे देखकर राघव के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह कोई और नहीं, बल्कि राघव का अपना जूनियर और सबसे भरोसेमंद साथी, सब-इंस्पेक्टर अमित था। अमित के हाथ में एक सोफिस्टिकेटेड वॉयस-क्लोनिंग डिवाइस और विमल खन्ना के फोन का क्लोन था। अमित ने मुस्कुराते हुए कहा, "चौंकिए मत सर। विमल खन्ना को मैंने ही मारा था, क्योंकि उन्हें मेरी काली करतूतों का पता चल गया था। और आज, आप दोनों यहाँ एक-दूसरे को मार डालेंगे।" For next part see comments! #story #thriller #suspense
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Story Telling@Story · 13 Aug 2026, 6:37 amअमित ने बंदूक तानी, लेकिन राघव एक तजुर्बेकार अफसर था। उसने तुरंत खुद को ज़मीन पर गिराया। मिल के अंदर गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी। अमित की गोली समीर के पास से गुजरी। राघव ने अंधेरे का फायदा उठाते हुए अमित के पैर पर निशाना लगाया और फायर कर दिया। गोली सीधे अमित के घुटने पर Àलगी और वह चीखते हुए गिर पड़ा। राघव ने तुरंत आगे बढ़कर उसकी बंदूक दूर फेंकी और उसे हथकड़ी लगा दी।
