Poetry Poet
@Poetry · 12 Aug 2026, 1:17 pm

नौकरी और संडे का इंतजार सोमवार को ऑफिस जाना, लगता है एक सजा, बॉस की बातें सुनकर, किरकिरा होता है मजा। काम का प्रेशर इतना है, जैसे सिर पर भारी लोड, चाय की चुस्की ही बस, बदलती है मूड। शनिवार की रात को, आता है थोड़ा चैन, संडे सुबह उठते ही, मंडे का शुरू होता है पेन। सोच रहे हैं छोड़ दें, ये फाइलों का जंजाल, पर सैलरी क्रेडिट का मैसेज, बदल देता है ख्याल! #poem #comedy #reality

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