नन्हे कान्हा और माखन चोर गोकुल में कान्हा को माता यशोदा का असीम प्रेम मिला। जैसे-जैसे कान्हा बड़े हुए, उनकी शरारतें भी बढ़ने लगीं। उन्हें गाय का ताजा माखन बेहद प्रिय था। यशोदा मैया और गोकुल की गोपियाँ माखन को मटकियों में भरकर ऊँचे छिटकों (छींके) पर लटका देती थीं ताकि कान्हा का हाथ वहाँ न पहुँच सके। लेकिन चतुर कान्हा अपने ग्वाल-बाल मित्रों के साथ मिलकर एक 'मानव पिरामिड' (मटका फोड़ की तरह) बना लेते और सबसे ऊपर चढ़कर माखन चुरा लेते थे। जब गोपियाँ मैया यशोदा से शिकायत करतीं, तो कान्हा मासूम चेहरा बनाकर कहते— "मैया, मोरी मैं नहीं माखन खायो!" कान्हा की इस प्यारी लीला के कारण ही आज भी जन्माष्टमी पर दही-हांडी प्रतियोगिता बड़े धूमधाम से आयोजित की जाती है। #story
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