Poetry Poet
@Poetry · 22 Aug 2026, 6:20 pm
ध्वनि अभी न होगा मेरा अंत अभी-अभी ही तो आया है मेरे वन में मृदुल वसंत—अभी न होगा मेरा अंत। हरे-हरे ये पात,डालियाँ, कलियाँ, कोमल गात! मैं ही अपना स्वप्न-मृदुल-कर फेरूँगा निद्रित कलियों पर जगा एक प्रत्यूष मनोहर। #poetry #poem
01206
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