कांच का टुकड़ा और हीरा (The True Worth) एक नगर में एक बहुत ही बुद्धिमान और सिद्ध संत रहते थे। एक दिन एक युवक उनके पास आया। वह बहुत निराश और उदास था। उसने संत के पैर छुए और रोते हुए कहा, "गुरुजी, मैं अपनी जिंदगी से तंग आ चुका हूँ। मुझे लगता है कि मेरा कोई वजूद नहीं। मैं इस दुनिया में सबसे बेकार इंसान हूँ। कोई मेरी इज्जत नहीं करता, और न ही मुझे अपनी जिंदगी की कोई कीमत समझ आती है। कृपया मुझे बताइए कि मेरा मूल्य क्या है?" संत ने उस युवक की बात शांति से सुनी। उन्होंने अपनी जेब से एक चमकता हुआ, लाल रंग का चमकदार पत्थर निकाला और उस युवक को देते हुए कहा, "मैं तुम्हारी मदद जरूर करूँगा, लेकिन पहले तुम्हें मेरा एक छोटा सा काम करना होगा।" युवक ने कहा, "जी गुरुजी, बताइए क्या करना है?" संत बोले, "इस पत्थर को लेकर बाजार जाओ और इसका मूल्य (कीमत) पता करके आओ। लेकिन याद रखना, इसे सिर्फ दिखाना है, बेचना बिल्कुल नहीं है।" युवक पत्थर लेकर सबसे पहले एक फल बेचने वाले के पास गया। उसने फल वाले को वह पत्थर दिखाया और पूछा, "भाई, इस पत्थर के बदले तुम मुझे क्या दे सकते हो?" फल वाले ने चमकदार पत्थर देखा और कहा, "यह सुंदर दिखता है, मैं इसके बदले तुम्हें 10 संतरे दे सकता हूँ।" युवक ने मना कर दिया और आगे बढ़ गया। इसके बाद वह एक सब्जी बेचने वाले के पास गया। सब्जी वाले ने पत्थर को उलट-पलट कर देखा और कहा, "मैं इसके बदले तुम्हें एक बोरी आलू दे सकता हूँ।" युवक ने वहाँ भी मना कर दिया। फिर वह युवक एक बर्तनों की दुकान पर गया। दुकानदार ने पत्थर की चमक देखी और कहा, "यह कोई अनोखा पत्थर लगता है, मैं इसके बदले तुम्हें 50 स्टील के बर्तन दे सकता हूँ।" युवक ने कहा कि वह इसे बेच नहीं सकता, सिर्फ कीमत जानने आया है। आखिर में, वह युवक शहर के सबसे बड़े जौहरी (Jeweler) की दुकान पर गया। जौहरी ने जैसे ही उस लाल पत्थर को देखा, उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने तुरंत एक साफ मखमल का कपड़ा बिछाया, उस पर पत्थर को रखा और उसके आगे सिर झुकाया। जौहरी ने कांपती आवाज में पूछा, "तुम यह कहाँ से लाए हो? यह कोई आम पत्थर नहीं है, यह दुनिया का सबसे कीमती 'रूबी' (माणिक्य) है! अगर मैं अपनी पूरी दुकान, अपनी सारी संपत्ति और यह पूरा शहर भी बेच दूँ, तो भी मैं इसकी सही कीमत नहीं चुका सकता। यह अनमोल है!" #story #worth #value
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Story Telling@Story · 16 Aug 2026, 5:58 pmयुवक हैरान रह गया। वह तुरंत दौड़कर संत के पास वापस आया और पूरी बात बताई।संत मुस्कुराए और बोले, "पुत्र, तुम्हें तुम्हारे सवाल का जवाब मिल गया। तुम भी इस रूबी की तरह अनमोल हो। लेकिन दुनिया तुम्हें उतना ही आँकेगी, जितनी उसकी खुद की समझ और औकात होगी। फल वाले ने तुम्हें 10 संतरे की कीमत का समझा, सब्जी वाले ने एक बोरी आलू का और जौहरी ने तुम्हें अनमोल बताया।
