Poetry Poet
@Poetry · 25 Aug 2026, 6:15 pm

वक़्त और रेत (Time and Sand) मुट्ठी से फिसलती रेत सी है ये ज़िंदगी, जितना पकड़ना चाहो, उतनी ही छूट जाती है। सोचा था समेट लूँगा सारे हसीं लम्हे, पर वक़्त की रफ़्तार हर उम्मीद तोड़ जाती है। जो बीत गया वो बस एक साया है, जो पास है, वही सब ने पाया है। कल की फ़िक्र में आज को मत खोना, इस पल में ही छुपा जीवन का सरमाया है। #poetry #poem

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