फल वाली और कान्हा (प्रेम का सौदा) गोकुल की गलियों में एक गरीब औरत सिर पर टोकरी रखकर फल बेचने आया करती थी। वह आवाज लगाती, "फल ले लो, मीठे फल ले लो!" एक दिन नन्हे कान्हा ने उसकी आवाज सुनी। उन्होंने देखा कि जब भी घर के बड़े लोग फल लेते हैं, तो बदले में अनाज (गेहूं या चावल) देते हैं। कान्हा भी घर के भीतर गए और अपनी नन्हीं हथेलियों में मुट्ठी भर अनाज के दाने भर लिए। लेकिन जब तक वे दौड़ते हुए बाहर आए, उनकी छोटी उंगलियों के बीच से अधिकांश अनाज के दाने जमीन पर गिर गए। जब वे फल वाली के पास पहुँचे, तो उनकी हथेली में केवल दो-चार दाने ही बचे थे। कान्हा ने उन दानों को आगे बढ़ाया और मासूमियत से बोले, "मुझे फल दे दो।" वह फल वाली कान्हा के इस रूप और उनकी भोली मुस्कान को देखकर सब कुछ भूल गई। उसने अनाज के उन गिरे-चुने दानों को ले लिया और बदले में कान्हा की दोनों हथेलियों को सबसे मीठे और सुंदर फलों से भर दिया। कान्हा खुश होकर महल की तरफ दौड़ गए। लेकिन चमत्कार तो तब हुआ जब उस फल वाली ने अपनी टोकरी को देखा। अनाज के उन दो-चार दानों के बदले उसकी पूरी टोकरी सोने, चांदी और बहुमूल्य रत्नों से भर चुकी थी। भगवान केवल प्रेम के भूखे होते हैं, वस्तु के नहीं। #story #prem # bhav
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