वफ़ादार शेरू (The Loyal Sheru) Genre: Animal / Emotional शेरू कोई महंगी नस्ल का कुत्ता नहीं था, वह गली का एक साधारण सा आवारा कुत्ता था। लेकिन पूरे मोहल्ले में उसकी वफादारी की मिसाल दी जाती थी। उसका सबसे ज्यादा लगाव रामू काका से था, जो सड़क के किनारे एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे। रामू काका रोज़ सुबह शेरू को एक बंद मक्खन और थोड़ी सी चाय देते थे, और शेरू बदले में दिनभर उनकी दुकान के बाहर बैठकर रखवाली करता था। एक रात, दुकान बंद करके रामू काका अपने घर लौट रहे थे। सुनसान रास्ते पर अचानक तीन चोरों ने उन्हें घेर लिया और उनके पास मौजूद दिनभर की कमाई छीनने की कोशिश की। रामू काका ने विरोध किया, तो एक चोर ने चाकू निकाल लिया। ठीक उसी पल, अंधेरे से निकलकर शेरू एक शिकारी की तरह उन चोरों पर झपट पड़ा। उसने एक चोर का पैर पकड़कर उसे जमीन पर गिरा दिया और जोर-जोर से भौंकने लगा। शेरू के इस अचानक हमले से चोर घबरा गए। उन्होंने काका के पैसे छोड़े और वहां से भाग खड़े हुए। लेकिन भागते समय एक चोर ने शेरू के पेट पर चाकू से वार कर दिया। शेरू वहीं खून से लथपथ होकर गिर पड़ा। रामू काका रोते हुए उसे अपनी बाहों में उठाकर तुरंत पशु अस्पताल भागे। पूरी रात रामू काका ऑपरेशन थिएटर के बाहर हाथ जोड़कर प्रार्थना करते रहे। सुबह डॉक्टर बाहर आए और मुस्कुराते हुए बोले, "काका, आपके कुत्ते की जान बच गई है। घाव गहरा था, लेकिन इसकी जीने की इच्छा बहुत मजबूत थी।" जब काका शेरू के पास गए, तो उसने दर्द में भी अपनी पूंछ हिलाकर उनका स्वागत किया। उस दिन के बाद से, शेरू सिर्फ दुकान का रखवाला नहीं, बल्कि रामू काका के घर का सबसे लाडला सदस्य बन गया। #story
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