सच्ची आस्था और छतरी एक गाँव में भयंकर सूखा पड़ा था। तीन साल से बारिश की एक बूंद भी नहीं गिरी थी। फसलें सूख चुकी थीं और कुएं खाली हो चुके थे। गाँव के मुखिया ने सभी लोगों को इकट्ठा किया और कहा, "कल सुबह हम सब गाँव के मैदान में ईश्वर से बारिश की प्रार्थना करने के लिए इकट्ठा होंगे। सब लोग पूरे मन से ईश्वर से प्रार्थना करना।" अगले दिन सुबह, गाँव के सभी लोग मैदान में जमा हुए। हर कोई परेशान था और ईश्वर से मिन्नतें कर रहा था। उसी भीड़ में एक छोटा बच्चा भी आया था। उस बच्चे के हाथ में एक बड़ी सी छतरी (छाता) थी। गाँव के एक बुजुर्ग ने उस बच्चे को देखा और हँसते हुए पूछा, "बेटा, आसमान में दूर-दूर तक बादल का एक टुकड़ा भी नहीं है, इतनी तेज धूप है, फिर तुम यह छतरी क्यों लेकर आए हो?" बच्चे ने पूरी मासूमियत और दृढ़ विश्वास के साथ जवाब दिया, "दादाजी, हम सब यहाँ ईश्वर से बारिश कराने की प्रार्थना करने ही तो आए हैं न? मुझे पूरा भरोसा है कि जब हम सच्चे मन से प्रार्थना करेंगे, तो ईश्वर हमारी सुनेंगे और बारिश जरूर होगी। इसलिए मैं यह छतरी लाया हूँ ताकि घर लौटते समय मैं भीग न जाऊँ।" बच्चे की बात सुनकर बुजुर्ग की आँखें भर आईं। उसे समझ आ गया कि असली आस्था किसे कहते हैं। हम ईश्वर से प्रार्थना तो करते हैं, लेकिन मन में संदेह रखते हैं। उस बच्चे के पास प्रार्थना के साथ-साथ ईश्वर पर अटूट विश्वास भी था। सीख: ईश्वर पर विश्वास का मतलब है कि प्रार्थना करने के बाद उसके पूरे होने का भरोसा रखना, ठीक उस बच्चे की छतरी की तरह। -------------------------- #story
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