गुच्छे की आखिरी चाबी एक बार की बात है, एक शहर में एक मूर्तिकार रहता था। वह बहुत ही खूबसूरत और जीवंत मूर्तियां बनाता था। उसकी कला की प्रशंसा दूर-दूर तक थी। एक दिन उसे एक बहुत ही खास और मजबूत पत्थर मिला। उसने सोचा कि इस पत्थर से वह भगवान की एक अद्भुत मूर्ति बनाएगा।मूर्तिकार ने अपने औजार उठाए और पत्थर को आकार देने के लिए उस पर हथौड़े से पहला वार किया। पत्थर बहुत सख्त था, इसलिए उस पर कोई असर नहीं हुआ। मूर्तिकार ने फिर से पूरी ताकत से हथौड़ा चलाया, लेकिन पत्थर टस से मस नहीं हुआ।उसने हार नहीं मानी। वह लगातार पत्थर पर हथौड़े से चोट करता रहा। १०, २०, ५०, और देखते-देखते उसने ९९ बार पत्थर पर जोर-जोर से प्रहार किया। लेकिन हर बार पत्थर अपनी जगह पर वैसा ही रहा, उस पर एक छोटी सी दरार भी नहीं आई।मूर्तिकार बुरी तरह थक चुका था और निराश हो गया। उसने सोचा, "यह पत्थर बहुत ही बेकार और कठोर है, इसे तोड़ना नामुमकिन है।" ९९वीं बार प्रयास करने के बाद उसने थककर हथौड़ा नीचे रख दिया और हार मान ली।तभी वहां से एक दूसरा आम मूर्तिकार गुजर रहा था। उसने उस सुंदर पत्थर को देखा और सोचा कि क्यों न इस पर एक आखिरी प्रयास किया जाए। उसने पास पड़ा हथौड़ा उठाया और पत्थर पर सिर्फ एक आखिरी वार किया।और चमत्कार हुआ! वह पत्थर केवल उसी एक चोट से दो भागों में टूट गया, क्योंकि लगातार ९९ प्रहारों की वजह से वह अंदर से कमजोर हो चुका था। पहला मूर्तिकार यह देखकर बहुत पछताया कि काश उसने वह १००वां प्रयास कर लिया होता। कहानी से सीख (Moral) हम अक्सर अपने जीवन में किसी काम को पूरा करने के लिए बहुत मेहनत करते हैं। लेकिन जब सफलता मिलने ही वाली होती है, तो हम धैर्य खो देते हैं और प्रयास करना बंद कर देते हैं। याद रखिए, सफलता की राह में कई बार गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है। इसलिए तब तक प्रयास करते रहिए जब तक कि लक्ष्य हासिल न हो जाए। #story #patience #hardwork
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