सीक्रेट रेसिपी शर्मा जी के मोहल्ले में पिछले बीस सालों से एक ही बहस चल रही थी—वर्मा जी के ढाबे के समोसों में ऐसा क्या खास है? उन समोसों का स्वाद इतना लाजवाब था कि लोग दूर-दूर से गाड़ी रोककर वहाँ खाने आते थे। शर्मा जी, जो खुद को खाने का बहुत बड़ा पारखी मानते थे, कई सालों से वर्मा जी की उस 'सीक्रेट रेसिपी' का पता लगाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे। उन्होंने हर तरह के मसाले आजमाए, लेकिन वैसा स्वाद कभी नहीं ला पाए।एक रविवार की सुबह, शर्मा जी ने तय किया कि आज वह इस राज़ को खोलकर ही रहेंगे। वह चुपके से वर्मा जी के ढाबे की रसोई के पीछे वाली खिड़की के पास जाकर छिप गए। अंदर वर्मा जी बड़े चाव से उबले हुए आलू छील रहे थे। शर्मा जी अपनी डायरी और पेन निकालकर बिल्कुल मुस्तैद हो गए। उन्होंने देखा कि वर्मा जी ने आलू में साधारण नमक, मिर्च, धनिया और थोड़ा सा अमचूर ही डाला। कोई भी जादुई या गुप्त मसाला वहाँ नहीं था। शर्मा जी हैरान रह गए। जब वर्मा जी समोसे तलकर बाहर आए, तो शर्मा जी खिड़की से निकलकर सीधे उनके सामने आ गए। उन्होंने खीझते हुए पूछा, "वर्मा भाई, मैं सब देख रहा था। तुमने कोई खास मसाला नहीं डाला, फिर भी तुम्हारे समोसे पूरे शहर में सबसे बेहतरीन कैसे बनते हैं? सच बताओ, राज़ क्या है?" वर्मा जी ज़ोर से हँसे और शर्मा जी के कंधे पर हाथ रखकर बोले, "शर्मा जी, असली राज़ मसालों में नहीं, बनाने के तरीके में है। मैं हर सुबह समोसे बनाने से पहले सिर्फ ताज़े मसालों को खुद ओखली में कूटता हूँ और कभी भी जल्दबाज़ी नहीं करता। धीमी आँच पर सब्र और प्यार से पकाता हूँ। बस, यही मेरा सीक्रेट है।" शर्मा जी मुस्कुरा दिए; उन्हें समझ आ गया कि स्वाद किसी गुप्त डिब्बे में नहीं, बल्कि लगन में छिपा होता है। #story
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