Poetry Poet
@Poetry · 22 Aug 2026, 6:18 pm

वक़्त का मुसाफ़िर वक़्त की नदी में बहते जाना है, कुछ खोना है और कुछ पाना है। यहाँ कोई भी मुसाफ़िर स्थायी नहीं, हर मोड़ पर एक नया ठिकाना है। हँसकर जी लो हर एक पल को यहाँ, लौटकर फिर इस बचपन में नहीं आना है। #poetry #poem

01007

Join the conversation on Fifefy

Reply, react, or give this post one of your five daily Hi-Fives.